Taj Mahal: बुद्ध पूर्णिमा पर ताज का दीदार होते ही झूम उठी ‘चांदनी’, 190 सैलानियों ने किया रात्रि दर्शन

By | May 17, 2022


बुद्ध पूर्णिमा पर ताजमहल का दीदार होते ही चांदनी झूम उठी। चांद की चांदनी की चुनर ओढ़े ताजमहल का सोमवार रात 190 सैलानियों ने दीदार किया। दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कैलेंडर में बुद्ध पूर्णिमा रविवार की रही। इस वजह से सोमवार रात को 190 पर्यटकों ने ताज का दीदार किया, जबकि रविवार को इनकी संख्या 330 रही। बीते माह रमजान में रात्रि दर्शन बंद होने के कारण इस बार ताजमहल को चांदनी रात में देखने के  लिए पर्यटकों ने एक दिन का इंतजार किया। एक दिन पहले आगरा आकर बुकिंग कराई और ताज को बुद्ध पूर्णिमा की रात चांदनी से सराबोर देखा। ताज के दीवानों में जबरदस्त उत्साह नजर आया, हालांकि चमकी नजर नहीं आई।

आगरा एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक ताजमहल के रात्रि दर्शन में अब चमकी नजर नहीं आती। चांद के एक खास एंगल से ताज के नगीनों पर जब रोशनी पड़ती है तो वह चमकते हैं, जो केवल मुख्य गुंबद से ही दिखते हैं, जबकि ताज का दीदार रात में रॉयल गेट के रेड सैंड स्टोन प्लेटफॉर्म से होता है जो 330 मीटर दूर है। वहां तक चांद का वह कोण नहीं बन पाता।

रात में इतने पर्यटक कर सकते हैं दीदार 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुए ताजमहल के नाइटव्यू को पूर्णिमा से दो दिन पहले और दो दिन बाद कुल पांच रातों में देखा जा सकता है। हर रात आठ शिफ्ट में 50-50 के ग्रुप में कुल 400 लोग ही देख सकते हैं। हर शिफ्ट 30 मिनट की होती है जो रात 8.30 बजे से 12.30 बजे तक  चलती है।

दिन में 16512 ने निहारा ताज

आगरा में पारा 45 डिग्री पार होने और लू के थपेड़ों के बाद भी ताजमहल का जादू पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। सोमवार को 16512 सैलानियों ने ताजमहल निहारा। सुबह 6 से 10 बजे के बीच सैलानियों की भीड़ उमड़ पड़ी, जबकि दोपहर एक से शाम 5 बजे के बीच पर्यटकों की संख्या कम रही। 

दोपहर में ताजमहल के पत्थरों के दहकने के कारण पर्यटक सुबह और शाम को ही पहुंच रहे हैं। सोमवार को 9762 ने ऑनलाइन टिकट बुक किए, जबकि 6750 ने काउंटर से टिकट खरीदे। 2143 पर्यटकों ने मुख्य गुंबद में शाहजहां मुमताज की कब्रों को देखा। इसके लिए 200 रुपये का अतिरिक्त शुल्क है।

स्मारक-    पर्यटक

आगरा किला    – 2593

फतेहपुर सीकरी- 656

एत्माद्दौला-     255

महताब बाग-    109

रामबाग-    141



Source link