Kashmiri Pandits Exodus: घुटनों पर गोली मारी, तड़पता छोड़कर लस्सी पीने लगे आतंकी, कश्मीरी पंडितों की दर्दनाक कहानियां

By | June 4, 2022


कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग से घाटी में दहशत है। इन हत्याओं ने 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की याद दिला दी है। हर किसी के जुबां पर कश्मीरी पंडितों की कहानियां आने लगी हैं। कश्मीरी पंडित खुद इसे बयां कर रहे हैं। आज हम आपको 1989 की उस घटना के बारे में भी बताएंगे, जहां से कश्मीरी हिंदुओं पर अत्याचार शुरू हुआ था। यह भी बताएंगे कि कैसे हिंदुओं का नरसंहार हुआ और वह कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर हुए…

 

प्रभावती, जिन्हें सबसे पहले मारा गया

कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार की शुरुआत 14 मार्च 1989 से शुरू हुई। तब पहली बार टारगेट किलिंग का मामला सामने आया। बडगाम जिले की रहने वाली प्रभावती हरि सिंह मार्ग से गुजर रहीं थीं। इसी दौरान कुछ आतंकियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। देखते ही देखते प्रभावती ने दम तोड़ दिया। ये टारगेट किलिंग का पहला मामला था। इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ वो 2003 में जाकर ही थमा। 

 

फिर बड़े लोगों को बनाया जाने लगा निशाना

प्रभावती की हत्या के बाद कुछ दिन माहौल शांत रहा, लेकिन 14 सितंबर 1989 को एक बार फिर से घाटी दहल गई। आतंकवादियों ने मशहूर कश्मीरी पंडित और वकील पं. टीका लाल टपलू को उनके घर में घुसकर गोलियों से भून दिया। इस हत्या ने कश्मीरी पंडितों के बीच खौफ भर दिया। इसके कुछ दिनों बाद ही जस्टिस नीलकंठ गंजू, शीला कौल टिक्कू को मार दिया गया। एक दिसंबर 1989 को श्रीनगर के महाराजगंज के रहने वाले अजय कपूर को भरे बाजार में आतंकियों ने गोलियों से झलनी कर दिया। 27 दिसंबर को एडवोकेट प्रेमनाथ भट्ट, सरकारी कर्मचारी बलदेव राज दत्ता का अपहरण करके बुरी तरह से मार दिया गया। बलदेव का शव चार दिन बाद क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था। आतंकवादियों ने शरीर का एक-एक अंग काट दिया था। 

 

वो दिन, जिसने दुनिया को हिला दिया

25 जनवरी 1990 की बात है। श्रीनगर में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना अपने साथियों के साथ बस स्टैंड पर एयरफोर्स की बस का इंतजार कर रहे थे। इस बीच, मारुति जिप्सी से हथियारबंद आतंकी आए और एके-47 से गोलियां बरसानी शुरू कर दी। रवि समेत एयरफोर्स के चार जवानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। हाल ही में टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद पाने वाला यासीन मलिक के भी हत्या में शामिल होने की बात सामने आई थी। 

 

गोली मारकर लस्सी पीते रहे आतंकी, सामने तड़पता रहा युवक

23 जनवरी 1990 की बात है। आतंकवादियों ने कश्मीरी हिंदू अशोक काजी के दोनों घुटनों पर गोली मारी। अशोक बाजार गए थे। अशोक भाई मक्खन काजी बताते हैं कि आतंकी बिट्टा कराटे ने दूसरे आतंकियों के साथ मिलकर मेरे भाई पर तीन गोलियां चलाईं। वह जमीन पर गिर गया और तड़पता रहा। कोई भी उसकी मदद करने नहीं आया। लोग घर की खिड़कियों से देखते रहे। आतंकी पास की दुकान पर लस्सी पीते रहे। जब उन्होंने देखा कि वो अभी भी जिंदा है, तो उसके पास गए और उसे लातों से मारा। फिर उस पर गोलियां चलाईं, जब तक उसने दम न तोड़ दिया। इसके बाद छोटे भाई के शव को पास के नाले में फेंक कर चले गए।

 

 



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