Gyanvapi Mosque: इबादतगाहों की हिफाजत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

By | May 26, 2022


सार

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ज्ञानवापी मस्जिद सहित अन्य धर्मस्थलों की हिफाजत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। यह निर्णय बोर्ड की मजलिस-ए-शूरा में लिया गया।

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ज्ञानवापी मस्जिद सहित देश भर के इबादतगाहों की हिफाजत के लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। बुधवार को बोर्ड की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में इसका निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि धर्म स्थल अधिनियम 1991 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल की गई याचिका में भी बोर्ड पक्षकार बनेगा। इसके अलावा बैठक में वर्तमान समय में धार्मिक मुददों पर विवाद पैदा करने को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश मानते हुये इबादतगाह बचाओ अभियान देश भर में चलाने पर सहमति बनी।

खदरा स्थित जमीअतुल कुर्रा में बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद यूसुफ अजीजी की अध्यक्षता में संपन्न हुई वर्चुअल बैठक में देश भर में तमाम मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने के लगातार हो रहे दावों पर चिंता जाहिर की गई। इसके अलावा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर चर्चा करते हुये ज्ञानवापी सहित अन्य मस्जिदों पर किये जा रहे मुकदमों पर सवाल उठाये गये।

बोर्ड के महासचिव डा. मोईन अहमद खान ने कहा कि संविधान की व्यवस्था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बाबरी मस्जिद जजमेंट में मान्यता दी है उसके बाद भी निचली अदालतों से आये आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय आहत व बेचैन है। ऐसे में मस्जिदों, दरगाहों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में इबादतगाहों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ से रोकने की अपील करेगा।

उन्होंने कहा कि संविधान, कानून के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देश को भरोसा दिलाना चाहिये कि किसी के साथ गलत नही होगा। इस मौके पर मुख्य रूप से बोर्ड के उपाध्यक्ष नसीम अहमद, संयोजक जावेद अहमद आदि मौजूद रहे।

विस्तार

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ज्ञानवापी मस्जिद सहित देश भर के इबादतगाहों की हिफाजत के लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। बुधवार को बोर्ड की मजलिस-ए-शूरा की बैठक में इसका निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि धर्म स्थल अधिनियम 1991 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल की गई याचिका में भी बोर्ड पक्षकार बनेगा। इसके अलावा बैठक में वर्तमान समय में धार्मिक मुददों पर विवाद पैदा करने को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश मानते हुये इबादतगाह बचाओ अभियान देश भर में चलाने पर सहमति बनी।

खदरा स्थित जमीअतुल कुर्रा में बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद यूसुफ अजीजी की अध्यक्षता में संपन्न हुई वर्चुअल बैठक में देश भर में तमाम मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने के लगातार हो रहे दावों पर चिंता जाहिर की गई। इसके अलावा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर चर्चा करते हुये ज्ञानवापी सहित अन्य मस्जिदों पर किये जा रहे मुकदमों पर सवाल उठाये गये।

बोर्ड के महासचिव डा. मोईन अहमद खान ने कहा कि संविधान की व्यवस्था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बाबरी मस्जिद जजमेंट में मान्यता दी है उसके बाद भी निचली अदालतों से आये आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय आहत व बेचैन है। ऐसे में मस्जिदों, दरगाहों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में इबादतगाहों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ से रोकने की अपील करेगा।

उन्होंने कहा कि संविधान, कानून के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देश को भरोसा दिलाना चाहिये कि किसी के साथ गलत नही होगा। इस मौके पर मुख्य रूप से बोर्ड के उपाध्यक्ष नसीम अहमद, संयोजक जावेद अहमद आदि मौजूद रहे।



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