Azamgarh Bypoll: पूर्व सांसद के बेटे पर दांव लगा सकती है सपा, सुशील को बनाया जा सकता है आजमगढ़ से प्रत्याशी

By | June 3, 2022


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समाजवादी पार्टी की तरफ से आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए पूर्व सांसद बलिहारी बाबू के बेटे सुशील को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। हालांकि दोपहर बाद 3:00 बजे तक किसी को फार्म बी जारी नहीं किया गया है। बलिहारी बाबू बामसेफ के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं।

समाजवादी पार्टी अभी तक इस सीट पर डिंपल यादव अथवा रमाकांत यादव को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही थी। लेकिन रमाकांत ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। बताया जाता है कि उन्होंने बदली सियासी परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने दलित उम्मीदवार उतारने का प्रस्ताव रखा।

इस पर बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आनंद का नाम पहले स्थान पर लिया जा रहा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि जल्द ही सूची सार्वजनिक की जाएगी। कई नामों पर विचार चल रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि दलित उम्मीदवार के जरिए यादव और मुस्लिम वोट बैंक की एकजुटता बरकरार रखने के साथ ही दलित वोट बैंक को भी जोड़ने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि बसपा गुड्डू जमाली को मैदान में उतारकर मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति पहले ही अपना चुकी है।

आजमगढ़ लोकसभा सीट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। यूपी चुनाव में वह करहल सीट पर लड़े और जीते। अब आजमगढ़ सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर बसपा के उम्मीदवार गुड्डू जमाली ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया।

आजमगढ़ सीट पर सपा के मजबूत होने को गुड्डू जमाली ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यदि सत्ता का दुरूपयोग कर बूथ कैप्चरिंग नहीं की गई होती तो मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव नहीं जीतते। उन्होंने 2027 में प्रदेश में बसपा की सरकार बनने का दावा किया। शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली बसपा के टिकट पर मुबारकपुर विधानसभा सीट से 2012 में विधयाक बने थे।  2022 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से इस्तीफा देकर वह असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम में शामिल हुए लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

विस्तार

समाजवादी पार्टी की तरफ से आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए पूर्व सांसद बलिहारी बाबू के बेटे सुशील को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। हालांकि दोपहर बाद 3:00 बजे तक किसी को फार्म बी जारी नहीं किया गया है। बलिहारी बाबू बामसेफ के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं।

समाजवादी पार्टी अभी तक इस सीट पर डिंपल यादव अथवा रमाकांत यादव को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही थी। लेकिन रमाकांत ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। बताया जाता है कि उन्होंने बदली सियासी परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने दलित उम्मीदवार उतारने का प्रस्ताव रखा।

इस पर बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आनंद का नाम पहले स्थान पर लिया जा रहा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि जल्द ही सूची सार्वजनिक की जाएगी। कई नामों पर विचार चल रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि दलित उम्मीदवार के जरिए यादव और मुस्लिम वोट बैंक की एकजुटता बरकरार रखने के साथ ही दलित वोट बैंक को भी जोड़ने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि बसपा गुड्डू जमाली को मैदान में उतारकर मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति पहले ही अपना चुकी है।

आजमगढ़ लोकसभा सीट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। यूपी चुनाव में वह करहल सीट पर लड़े और जीते। अब आजमगढ़ सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर बसपा के उम्मीदवार गुड्डू जमाली ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया।

आजमगढ़ सीट पर सपा के मजबूत होने को गुड्डू जमाली ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यदि सत्ता का दुरूपयोग कर बूथ कैप्चरिंग नहीं की गई होती तो मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव नहीं जीतते। उन्होंने 2027 में प्रदेश में बसपा की सरकार बनने का दावा किया। शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली बसपा के टिकट पर मुबारकपुर विधानसभा सीट से 2012 में विधयाक बने थे।  2022 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से इस्तीफा देकर वह असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम में शामिल हुए लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।



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