यूनेस्को रिपोर्ट: गणित में लड़कों के बराबर प्रदर्शन कर रहीं लड़कियां, 120 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण

By | April 29, 2022


सार

रिपोर्ट के अनुसार, गरीब देशों में भी यह लैंगिक असमानता खत्म हो गई है। वहीं कुछ देशों में यह अंतर धीरे-धीरे गायब हो रहा है। उदाहरण के लिए ग्रेड 8 तक गणित में लड़कियों के पक्ष में मलयेशिया में 7 प्रतिशत अंक, कंबोडिया में 3, कांगो में 1.7 अंक और फिलीपीन में 1.4 प्रतिशत अंकों का अंतर है।

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लैंगिक असमानता व बाधाओं पर वैश्विक बहस के बीच यूनेस्को की एक रिपोर्ट लड़कियों को लेकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाती है। यूनेस्को की ग्लोबल एजूकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, गणित में लड़कियां भी क्लास में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
 
इस रिपोर्ट का प्रकाशन करने से पहले प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में 120 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। हालांकि प्रारंभिक वर्षों में लड़कों का प्रदर्शन लड़कियों के बजाय बेहतर रहा लेकिन बाद में यह अंतर खत्म हो जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, गरीब देशों में भी यह लैंगिक असमानता खत्म हो गई है। वहीं कुछ देशों में यह अंतर धीरे-धीरे गायब हो रहा है। उदाहरण के लिए ग्रेड 8 तक गणित में लड़कियों के पक्ष में मलयेशिया में 7 प्रतिशत अंक, कंबोडिया में 3, कांगो में 1.7 अंक और फिलीपीन में 1.4 प्रतिशत अंकों का अंतर है। हालांकि, पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता के चलते लड़कियों में गणित सीखने को लेकर लालसा प्रभावित हो सकती है।

पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता का बुरा असर
भले ही लड़कियां उच्च प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में गणित में पकड़ बना रही हों, लेकिन अब भी दुनिया के सभी देशों में गणित में उच्चतम प्रदर्शन करने वालों में लड़के ही हैं। बता दें कि मध्यम और उच्च आय वाले देशों में माध्यमिक विद्यालय में लड़कियां विज्ञान में काफी अधिक अंक प्राप्त कर रही हैं। इसके बावजूद लड़कियों के विज्ञान में करियर चुनने की कम संभावना यही दर्शाता है कि पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता के कारण उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।

सबसे बड़ा लैंगिक अंतर सऊदी अरब में
प्राथमिक शिक्षा में सबसे बड़ा अंतर सऊदी अरब में दिखता है। यहां ग्रेड 4 में 77 फीसदी लड़कियां और 51 फीसदी लड़के पढ़ने में न्यूनतम दक्षता हासिल करते हैं। यह अंतर थाईलैंड में 18 प्रतिशत, डोमिनिकन गणराज्य में 11 और मोरक्को में 10 प्रतिशत है। मध्यम और उच्च आय वाले देशों में माध्यमिक विद्यालय में लड़कियां विज्ञान में काफी अधिक अंक प्राप्त कर रही हैं।

विस्तार

लैंगिक असमानता व बाधाओं पर वैश्विक बहस के बीच यूनेस्को की एक रिपोर्ट लड़कियों को लेकर एक सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाती है। यूनेस्को की ग्लोबल एजूकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, गणित में लड़कियां भी क्लास में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

 

इस रिपोर्ट का प्रकाशन करने से पहले प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में 120 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। हालांकि प्रारंभिक वर्षों में लड़कों का प्रदर्शन लड़कियों के बजाय बेहतर रहा लेकिन बाद में यह अंतर खत्म हो जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, गरीब देशों में भी यह लैंगिक असमानता खत्म हो गई है। वहीं कुछ देशों में यह अंतर धीरे-धीरे गायब हो रहा है। उदाहरण के लिए ग्रेड 8 तक गणित में लड़कियों के पक्ष में मलयेशिया में 7 प्रतिशत अंक, कंबोडिया में 3, कांगो में 1.7 अंक और फिलीपीन में 1.4 प्रतिशत अंकों का अंतर है। हालांकि, पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता के चलते लड़कियों में गणित सीखने को लेकर लालसा प्रभावित हो सकती है।

पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता का बुरा असर

भले ही लड़कियां उच्च प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में गणित में पकड़ बना रही हों, लेकिन अब भी दुनिया के सभी देशों में गणित में उच्चतम प्रदर्शन करने वालों में लड़के ही हैं। बता दें कि मध्यम और उच्च आय वाले देशों में माध्यमिक विद्यालय में लड़कियां विज्ञान में काफी अधिक अंक प्राप्त कर रही हैं। इसके बावजूद लड़कियों के विज्ञान में करियर चुनने की कम संभावना यही दर्शाता है कि पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता के कारण उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।

सबसे बड़ा लैंगिक अंतर सऊदी अरब में

प्राथमिक शिक्षा में सबसे बड़ा अंतर सऊदी अरब में दिखता है। यहां ग्रेड 4 में 77 फीसदी लड़कियां और 51 फीसदी लड़के पढ़ने में न्यूनतम दक्षता हासिल करते हैं। यह अंतर थाईलैंड में 18 प्रतिशत, डोमिनिकन गणराज्य में 11 और मोरक्को में 10 प्रतिशत है। मध्यम और उच्च आय वाले देशों में माध्यमिक विद्यालय में लड़कियां विज्ञान में काफी अधिक अंक प्राप्त कर रही हैं।



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