प्रवीण तांबे की जिंदगी कोच विद्या ने बदल डाली, 20 साल संघर्ष करके पाया अपना मुकाम

By | April 28, 2022


नई दिल्ली. पूर्व क्रिकेटर प्रवीण तांबे पर हाल ही में एक मूवी बनाई गई. जिसका शीर्षक था ‘कौन प्रवीण तांबे.’ यह फिल्म काफी मकबूल हुई. जब प्रोडक्शन हाउस ने फिल्म बनाने को लेकर तांबे से संपर्क किया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया था. प्रवीण का कहना था कि मैं सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और विराट कोहली नहीं हूं जो मुझ पर वे लोग फिल्म बनाना चाहते थे. हाल ही में प्रवीण तांबे ने कोलकाता नाइट राइडर्स के कुछ खिलाड़ियों के साथ मुंबई में अपने ऊपर बनी फिल्म ‘कौन प्रवीण तांबे’ देखी. इस फिल्म को देख कर केकेआर के कप्तान श्रेयस अय्यर काफी भावुक हुए. प्रवीण तांबे इन दिनों केकेआर के कोचिंग स्टाफ में शामिल हैं. फिल्म देखने के बाद तांबे से दर्शकों को संबोधित करने के लिए कहा गया. लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. वह बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर पाए. प्रवीण तांबे ने कहा, “मैं एक ही चीज उन्हें बता सकता था वह है अपने सपनों का पीछा करना. क्योंकि सपने सच होते हैं.”

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए प्रवीण तांबे ने कहा, “मैंने अपने पत्नी और भाई से फिल्म के बारे में पूछा कि यह कैसी थी. उन्होंने कहा कि यह अच्छी है. वे मुझे फिल्म की कहानी सुना रहे थे. प्रवीण ने कहा, नहीं नहीं. प्लीज मुझे कहानी नहीं सुनाइए. मुझे खुद फिल्म देखने दो.” प्रवीण तांबे के संघर्ष पर बनी इस फिल्म से राहुल द्रविड़ भी काफी प्रभावित हुए. उन्होंने फिल्म की कहानी को अपने भाषण में शामिल किया था. जो काफी वायरल हुआ.

पहली बार प्रवीण ने मना किया
अखबार से बात करते हुए प्रवीण कहते हैं कि जब फिल्म मेकर्स ने मूवी बनाने को लेकर संपर्क किया तो मुझे यकीन नहीं हुआ. तांबे ने कहा कि मैंने पहली बार इनकार कर दिया. उन्होंने फिर मुझे फोन किया और मुझसे मिलने के लिए कहा. फिल्म निर्माता मूवी के जरिए 41 साल के सफर को दिखाना चाहते थे. उनकी एक लाइन मेरे दिमाग में घर कर गई. मूवी मेकर्स ने कहा, “लोग यह जानते हैं कि आप 41 साल की उम्र में क्रिकेट खेले. लेकिन आपने 20 साल क्या किया इसके बारे में उन्हें पता नहीं है. लोगों को आपके संघर्ष के बारे में पता चलना चाहिेए. फिर मैं सहमत हो गया.”

आसान नहीं रहा प्रवीण का सफर
प्रवीण के जीवन में कई मोड़ आए. कभी वह एक कदम आगे चले तो कभी दो कदम पीछे हो गए. वह लगातार संघर्ष करते रहे. तांबे का सपना पेशेवर क्रिकेटर बनना था. लेकिन जीवन के झंझावात से वह आगे नहीं निकल पा रहे थे. 90 के दशक में ओरिएंट शिपिंग कंपनी में काम करने वाले उनके एक मित्र ने तांबे का नाम कार्पोरेट टीम टाइम्स शील्ड में ड्रॉफ्ट किया. लेकिन उन्हें विवाद का सामना करना पड़ा. कुछ साल क्रिकेट होने के बाद कंपनी ने बंद कर दिया. प्रवीण तांबे की नौकरी चली गई. इसके बाद उन्हें इक्का-दुक्का नौकरियों के ऑफर मिले. साल 2007 में डीवाई पाटिल ने उन्हें क्रिकेट खेलने की नौकरी दी. उसके अगले साल यानी 2008 में आईपीएल शुरू हूआ. तब तांबे स्टेडियम के अंदर संपर्क प्रबंधक थे. उसके बाद जो कुछ हुआ इतिहास बन गया.

कोच ने दी लेग स्पिनर बनने की सलाह
दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका मानना है कि जीवन हथेलियों की लकीरों से चलता है. प्रवीण तांबे की हथेलियों ने वास्तव में उनके जीवन को बदल दिया. उनके कोच विद्या पराडकर ने उन्हें सलाह दी की उन्हें लेग स्पिन ट्राई करनी चाहिए. क्योंकि उनकी हथेलियां बड़ी थीं. 90 के दशक में प्रवीण मीडियम पेसर हुआ करते थे. लेकिन मुंबई रणजी टीम के चयनकर्ताओं ने उन्हें सिलेक्शन के काबिल नहीं समझा. इसके बाद वह लेग स्पिनर बन गए.

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41 साल की उम्र में मिला मौका
41 साल की उम्र में उनका चयन विजय हजारे ट्रॉफी के लिए मुंबई की टीम में हुआ. लेकिन एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. साल 2013 आईपीएल की नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें खरीदा. जिसके बाद उनका आईपीएल डेब्यू हुआ. साल 2014 के सत्र में वह मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी में खेले. कुल मिलाकर प्रवीण तांबे ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों से लड़ते हुए क्रिकेटर बनने का सपना साकार किया. फिल्म ‘कौन प्रवीण तांबे’ में उनके जीवन के संघर्षों को बखूबी फिल्माया गया है.



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