जडेजा ने धोनी को उनके ही अंदाज में लौटाई कप्तानी, क्या सीएसके को संकट से उबार पाएंगे कैप्टन कूल?

By | April 30, 2022


नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स के नए-नवेले कप्तान रवींद्र जडेजा ने बीच राह में ही अपनी टीम की कप्तानी छोड़ दी है. इसके साथ ही मिडास टच वाले कैप्टन कूल एमएस धोनी की बतौर कप्तान री-एंट्री हो गई है. अब वक्त ही बताएगा कि यह फैसला सीएसके के लिए कितना फलदायी होगा. लेकिन यह तो साफ हो गया है कि धोनी का अचानक कप्तानी छोड़ने का दांव फेल हो गया है. धोनी ने आईपीएल 2022 शुरू होने से महज 2 दिन पहले कप्तानी छोड़कर सबको चौंका दिया था. सितारे को सलाम करने की परंपरा ने धोनी के इस फैसले की खूब तारीफ करवाई. लेकिन जहाज रवाना होने के बाद कप्तानी सौंपे जाने से रवींद्र जडेजा का खेल जरूर डिरेल हो गया और शायद इसी का खामियाजा है कि चेन्नई सुपर किंग्स आज पॉइंट टेबल में नीचे से दूसरे स्थान पर है.

चेन्नई सुपर किंग्स ने शनिवार को ट्वीट कर रवींद्र जडेजा के कप्तानी छोड़ने की आधिकारिक घोषणा की. सीएसके ने इस ट्वीट में कहा, ‘रवींद्र जडेजा सीएसके की कप्तानी एमएस धोनी को वापस सौंपेंगे. जडेजा ने अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है. उन्होंने एमएस धोनी से सीएसके का नेतृत्व करने का अनुरोध किया है. धोनी ने सीएसके के हित में टीम का नेतृत्व करना स्वीकार कर लिया है, ताकि जडेजा अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें.’

धोनी को कुछ चमत्कारिक करना होगा
क्रिकेटप्रेमी जानते हैं कि चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2022 में अब तक खेले गए 8 में से 6 मैच हार चुकी है. वह पॉइंट टेबल में 4 अंकों के साथ नौवें स्थान पर है. सीएसके को अब भी 6 मैच खेलने हैं. अगर वे इनमें से सारे मैच जीत ले तो प्लेऑफ में पहुंच सकती है. पांच जीत भी उम्मीदें जिंदा कर सकती हैं. लेकिन आईपीएल को जानने वाले यह भी जानते हैं कि यह काम आसान नहीं है. धोनी को कुछ चमत्कारिक करना होगा. कुछ वैसा ही, जैसा उन्होंने कुछ दिन पहले मुंबई इंडियंस के खिलाफ आखिरी ओवर में किया था.

जडेजा ने बीच में कप्तानी क्यों छोड़ दी?
कप्तानी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए सम्मान की बात होती है. अगर चेन्नई सुपर किंग्स जैसी दिग्गज टीम की कप्तानी का मौका मिले तो यह किसी सौभाग्य से कम नहीं कहा जा सकता. सवाल यह उठता है कि ऐसा होने पर भी रवींद्र जडेजा ने टूर्नामेंट के बीच में कप्तानी क्यों छोड़ दी? इसका जवाब सीएसके के मौजूदा प्रदर्शन में ढूंढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. क्योंकि सीएसके ने जब जडेजा को कप्तानी सौंपी तो यह दीर्घकालिक योजना थी. उनके कप्तान बनने पर कोई शक नहीं था. आखिर फ्रेंचाइजी ने उन्हें सबसे अधिक कीमत देकर रीटेन किया था. हां, जडेजा को जिस तरीके से कप्तानी सौंपी गई, उससे जरूर उनकी कामयाबी को लेकर कुछ शंका थी.

नहीं मिला योजना बनाने का वक्त
रवींद्र जडेजा को जब सीएसके की कप्तानी सौंपी गई तब आईपीएल का सीजन शुरू होने में सिर्फ 2 दिन बचे थे. इतने कम समय में कोई भी कप्तान अपनी योजना नहीं बना सकता. रवींद्र जडेजा भी नहीं बना पाए. आईपीएल 2022 में जडेजा बतौर कप्तान जरूर खेल रहे थे, लेकिन परदे के पीछे वही सब कुछ हो रहा था जो पहले से तय था. आईपीएल ऑक्शन 2022 के वक्त सीएसके की जो टीम चुनी गई, वह कप्तान धोनी की टीम थी. कोचिंग स्टाफ भी धोनी की पसंद का ही है. ऐसा नहीं कि सीएसके के कोचिंग स्टाफ में कोई कमी है. लेकिन उस पर धोनी की छाप है. संभव है कि कोचिंग स्टाफ में वह लचीलापन ना रहा हो जो जडेजा चाहते हों.

जडेजा को कप्तान के तौर पर कभी नहीं देखा गया
वैसे भी रवींद्र जडेजा को कप्तानी का कोई अनुभव नहीं था. वे एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका खेल पिछले 2-3 साल में ही पीक पर आया है. 2019 से पहले भारतीय टीम में उनकी जगह तक पक्की नहीं होती थी. एक वक्त था, जब उन्हें भारत की वनडे टीम से बाहर कर दिया गया था. टेस्ट टीम में उन्हें हमेशा रविचंद्रन अश्विन से चुनौती मिली है. 2020 के बाद से जरूर जडेजा देश के नंबर-1 ऑलराउंडर बनकर उभरे. वे भारतीय टीम में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं. लेकिन इस सबके बावजूद यह सच है कि उन्हें भारतीय कप्तान के तौर पर कभी नहीं देखा गया. यहां तक कि उनके बाद आने वाले केएल राहुल कप्तान बन गए. ऋषभ पंत को उप कप्तान बना दिया गया.

सीएसके का कप्तान बनने से प्रभावित हुई सोच
आप कह सकते हैं कि आईपीएल के बीच में भारतीय टीम का जिक्र क्यों? लेकिन इसकी ठोस वजह है. भारतीय क्रिकेटर, जो टीम इंडिया में जगह बना चुका है, उसकी सोच अपनी जगह बनाए रखने की होती है. वह देश के लिए टेस्ट मैच खेलना चाहता है, टी20 वर्ल्ड कप या वनडे वर्ल्ड कप खेलना चाहता है. वह अपने तमाम प्रयास भी इसी दिशा में करता है. रवींद्र जडेजा भी पिछले सालों में इसी सोच से आगे बढ़ते रहे हैं. वे एक बेहतरीन टीम-मैन हैं, जो आखिरी गेंद तक अपना 100 फीसदी कोशिश करता है. सीएसके का कप्तान बनाए जाने से उनकी यह सोच प्रभावित हुई. वे एक खिलाड़ी की बजाय कप्तान के तौर पर सोचने लगे, जिसका असर उनके खेल पर पड़ा. दबाव कुछ ऐसा बना कि वे टीम को प्रेरित करने की बजाय अपना स्वाभाविक खेल भी गंवा बैठे. पिछले 4-5 साल में यह पहला मौका है, जब जडेजा बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग तीनों में ही अपने रुतबे को कायम नहीं रख सके हैं.

‘सर जडेजा’ का रुतबा बनाए रखना जरूरी 
रवींद्र जडेजा को शायद इसके बाद लगा हो कि उन्हें पहले अपने खेल पर ध्यान देना होगा. ‘सर जडेजा’ का रुतबा बनाए रखने के लिए उन्हें हर हाल में अपना वह प्रदर्शन पाना होगा, जिसके करोड़ों प्रशंसक हैं. एक बात और. रवींद्र जडेजा को यह अच्छी तरह पता है कि वे कितना भी अच्छा क्यों ना खेल लें, उन्हें विराट कोहली या रोहित शर्मा का दर्जा हासिल नहीं होने वाला है. हर देश में कुछ ऐसे क्रिकेटर सामने आते हैं, जिन्हें 19-20 साल का होते-होते भविष्य का कप्तान कहा जाने लगता है. भारत में विराट कोहली, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत इनमें शामिल हैं. जडेजा ने आज से एक दशक पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तिहरे शतक लगा दिए थे, तब भी उनके बारे में ऐसी राय सामने नहीं आई.

जडेजा का संदेश- कप्तानी नहीं, अच्छा प्रदर्शन जरूरी
चेन्नई सुपर किंग्स ने रवींद्र जडेजा को कप्तान बनाए जाने के समय कहा था कि वह ऐसा खिलाड़ी चाहता है, जो अगले 4-5 साल तक टीम की अगुवाई कर सके. जडेजा को रीटेन करने के समय भी प्रबंधन के दिमाग में यह बात रही होगी. लेकिन जडेजा ने बीच आईपीएल में कप्तानी छोड़कर यह संदेश दिया है कि उनके लिए कप्तान बनने से ज्यादा जरूरी अच्छा प्रदर्शन करना है. यकीनन, चेन्नई सुपर किंग्स का मैनेजमेंट भी यही चाहेगा कि जडेजा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें. भारतीय टीम के हित में भी यही है कि जडेजा का आत्मविश्वास बना रहे क्योंकि आज की तारीख में वे देश में नंबर-1 ऑलराउंडर हैं. शायद यही सब सोचकर जडेजा ने बिलकुल धोनी के अंदाज में अचानक कप्तानी छोड़ने का फैसला ले लिया. दिलचस्प बात यह है कि जडेजा ने उन्हीं धोनी को वापसी कप्तानी सौंप दी, जिनसे उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी.

चेन्नई को धोनी के मिडास टच की जरूरत
लाख टके की बात यह है कि एमएस धोनी फिर कप्तानी करते दिखेंगे. कैप्टन कूल जानते हैं कि यह काम आसान नहीं होने वाला है. टीम 8 में से 6 मैच हारकर दबाव में है. उनका सबसे भरोसेमंद और महंगा खिलाड़ी (जडेजा) खोए आत्मविश्वास की तलाश कर रहा है. नई गेंद से विरोधी कैंप में कोलाहल पैदा करने वाला खिलाड़ी (दीपक चाहर) पूरे टूर्नामेंट से बाहर है. टीम में और भी कई समस्याएं हैं. लेकिन धोनी शायद इन मुश्किलों की बजाय टीम का ध्यान रॉबिन उथप्पा, अंबाती रायडू के बेहतरीन खेल की दिलाना चाहेंगे. उथप्पा-रायडू फॉर्म में हैं और अगर एक और बल्लेबाज के प्रदर्शन में निरंतरता आ जाय तो सीएसके की बैटिंग की चिंता दूर हो जाएगी. फिर गेंदबाजी की समस्या पर काम किया जा सकेगा. धोनी को मिडास टच वाला कप्तान कहा जाता है. सीएसके के प्रशंसक उम्मीद कर सकते हैं कि वे पारस की तरह किसी खिलाड़ी पर हाथ रखेंगे और चेन्नई एक्सप्रेस फिर चल निकलेगी. हालांकि, क्रिकेटिंग नजरिए से देखने पर यह काम आसान नजर नहीं आता.

क्या जडेजा फिर बन सकते हैं कप्तान
धोनी ने भले ही चेन्नई सुपरकिंग्स की कमान संभाल ली हो, लेकिन यह सबको पता है कि उनकी भूमिका केयरटेकर से ज्यादा नहीं है. सीएसके को अगले सीजन में हर हाल में नए कप्तान के साथ उतरना होगा. इसके लिए मोईन अली, ड्वेन ब्रावो से लेकर उथप्पा और ऋतुराज गायकवाड़ के नाम लिए जा रहे हैं. लेकिन हर नाम के साथ कुछ ना कुछ परेशानियां भी हैं. मोईन और ब्रावो विदेशी खिलाड़ी हैं. उम्रदराज भी हैं. ऐसे में इन पर दांव दोधारी तलवार साबित हो सकता है. उथप्पा भले ही भारतीय हैं, लेकिन उम्र उनकी भी 36 साल की हो चली है. गायकवाड़ युवा हैं और अगर वे जिम्मेदारी संभाल सके तो सीएसके के लिए सबसे मुफीद बात यही होगी. लेकिन जडेजा को भी नहीं भूलना चाहिए. संभव है कि जडेजा को इसकी पेशकश फिर से की जाय क्योंकि तब यह अचानक नहीं होगा. उन्हें अपनी टीम और प्लान बनाने का मौका फिर मिल जाएगा. क्रिकेट में कुछ भी संभव है और खासकर उस टीम में जिसकी कमान एमएस धोनी के हाथ में हो.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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