कश्मीरियत: घाटी में नए अंदाज में मन रहा नवरेह, देशभर से जुटे कश्मीरी पंडित शारिका देवी मंदिर में कर रहे पूजा अर्चना 

By | April 2, 2022


कश्मीर घाटी में नवरेह इस बार अलग अंदाज में मनाने की तैयारी है। 2 अप्रैल को हरिपर्वत स्थित शारिका देवी मंदिर में होने वाली विशेष पूजा में शामिल होने के लिए देश भर से कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग कश्मीर पहुंच चुके हैं। घाटी के लोग भी कश्मीरी पंडितों के स्वागत के लिए तैयार बैठे हैं। उनका कहना है कि कश्मीरी पंडित वापस आएं और उनके साथ मिलकर रहें। जेके पीस फोरम के चेयरमैन सतीश महालदार ने बताया कि इस कार्यक्रम का मकसद दहशत में घर-बार छोड़ने को मजबूर लोगों के लिए सुरक्षा व आत्मसम्मान की भावना जगाना है।

इस बार कोशिश है कि सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर पंडितों की वापसी का माहौल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष पूजा अर्चना के लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस बार इतिहास रचने जा रहे हैं। देश भर से करीब पांच हजार कश्मीरी पंडितों के इस पूजा में शामिल होने की संभावना है। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी और शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी भी आएंगे। शारिका मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शेर-ए-कश्मीर पार्क में नवरेह मिलन कार्यक्रम होगा। घाटी में भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ ही पंडितों की सम्मानजनक वापसी की आवाज बुलंद की जाएगी।

कश्मीरी पंडित लौटे और हमारे साथ रहें : इमरान

स्थानीय निवासी मोहम्मद शफी शाह ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि नवरेह पर कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग देश भर से यहां आ रहे हैं। 90 के दशक के बाद भी कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ भाईचारा कायम है। हम चाहते हैं कि वो आएं और हमारे साथ रहें। इमरान ने कहा कि कश्मीरी पंडित हमेशा हमारे समाज और कश्मीरियत का हिस्सा रहे हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि वो हमेशा हमारे साथ ही रहें।

पंडितों के बिना कश्मीरियत अधूरी है : पीडीपी

पीडीपी के युवा नेता नजमु साकिब ने कहा, हमारी जो मिश्रित संस्कृति और यहां की कश्मीरियत है वो कश्मीरी पंडितों की मौजूदगी के बिना अधूरी है। हमारी हमेशा यह कोशिश रही है कि वे गरिमापूर्ण ढंग से वापसी करें। कश्मीर फाइल्स पर साकिब ने कहा कि कुछ लोग कश्मीरी पंडितों के जख्मों पर सियासी रोटियां सेक रहे हैं। पीडीपी ने हमेशा से कश्मीरी पंडितों के लिए टाउनशिप और नौकरियों के साथ-साथ उनकी वापसी की बात की है और कभी भी सियासी रोटियां नहीं सेकीं। हमारी कश्मीरी पंडितों से गुजारिश है कि वह वापस आएं और समाज का हिस्सा बनें।

कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार की जांच हो : नेकां

नेशनल कांफ्रेंस की अतिरिक्त प्रवक्ता इफरा जान ने कहा कि मुझे भी नवरेह पर शारिका देवी मंदिर में पूजा अर्चना में बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि नेकां पहली राजनीतिक पार्टी थी जिसने कश्मीरी पंडितों की वापसी की मांग की थी। हम आज भी उनकी गरिमापूर्ण वापसी की मांग करते हैं। उनके साथ जो कुछ भी हुआ उसकी जांच के लिए आयोग बैठना चाहिए। कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अधूरा है। बता दें, नवरेह का अर्थ कश्मीरी नए साल से है। कश्मीरी पंडित 2 अप्रैल को शुभ दिन के रूप में मनाते हैं।  



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