उत्तर प्रदेश : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक अपराध पर भी गैंगस्टर एक्ट के तहत चल सकता है मुकदमा, याचिका खारिज की

By | April 28, 2022


सार

शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार क़ानून के प्रावधानों को पढ़ा और माना जाना चाहिए। गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों से साफ है कि गिरोह का सदस्य होने पर और गैंगस्टर्स में उल्लिखित गतिविधियों में लिप्त होने पर एक अपराध के लिए भी इस विशेष अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कठोर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए किसी व्यक्ति के बार-बार अपराधी होने की आवश्यकता नहीं है। गिरोह का हिस्सा होने पर केस के आरोपी पर भी विशेष कानून के तहत केस चलाया जा सकता है।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने इस विशेष कानून के तहत अभियोजन को चुनौती देने वाली एक महिला श्रद्धा गुप्ता की याचिका को खारिज कर दिया। महिला का कहना था कि उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और उसे पहली बार किसी आपराधिक मामले में नामजद किया गया है, ऐसे में उसपर गैंगस्टर एक्ट नहीं लग सकता। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) और गुजरात आतंकवाद एवं संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के विपरीत, गैंगस्टर अधिनियम के तहत ऐसा कोई विशेष प्रावधान नहीं है जिसमें कहा गया है कि गैंगस्टर एक्ट के तहत किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए एक से अधिक एफआईआर या चार्जशीट होनी चाहिए।

कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार क़ानून के प्रावधानों को पढ़ा और माना जाना चाहिए। गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों से साफ है कि गिरोह का सदस्य होने पर और गैंगस्टर्स में उल्लिखित गतिविधियों में लिप्त होने पर एक अपराध के लिए भी इस विशेष अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

दिल्ली की जंग…संविधान पीठ करे मामले की सुनवाई : केंद्र
दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं के अधिकार को लेकर राज्य सरकार से जंग के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राजधानी में ट्रांसफर-पोस्टिंग केंद्र के नियंत्रण में होनी चाहिए। केंद्र ने प्रशासनिक सेवाओं के मुद्दे को संविधान पीठ को भेजे जाने का अनुरोध किया।

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की पीठ से कहा कि संविधान पीठ को भेजने के 2017 के आदेश से समझा जा सकता है कि अनुच्छेद 239एए के सभी पहलुओं के लिए जरूरी संदर्भ शर्तों की व्याख्या की जरूरत है। मेहता ने कहा, अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सुझाए शासन के मॉडल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए उचित नहीं समझा जाता है।

उचित शासन मॉडल सुझाने के लिए बालकृष्णन समिति का गठन हुआ था। मेहता ने दलील दी, दिल्ली विधानसभा के विधायी अधिकारों के संबंधों में सूची 2 की प्रविष्टि 41 को लेकर विवादों पर संविधान पीठ फैसला नहीं करती, विवाद पर प्रभावी तरीके से निर्णय नहीं लिया जा सकता।

यूनिटेक के घर खरीदारों को मिला रिफंड का मौका
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूनिटेक के ऐसे घर खरीदारों को पैसा वापस लेने का विकल्प दिया जिनकी उम्र 75 वर्ष से अधिक है या जिन्हें स्वास्थ्य कारणों से पैसे की जरूरत है। कोर्ट ने घर खरीदारों से जुड़े वेब पोर्टल पर 15 मई तक जरूरी डाटा अपलोड करने के लिए कहा है। वहीं यूनीटेक बोर्ड मैनेजमेंट ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि कानूनी अनुमति मिलने और फंड उपलब्ध होने पर कंपनी इस वर्ष अगस्त से शुरू कर अगले नौ से 12 महीने में एक से डेढ़ हजार तक फ्लैटों की आपूर्ति कर सकती है। कंपनी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण को कोर्ट ने स्थिति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने इस बात पर विचार किया 75 वर्ष से अधिक उम्र वालों, स्वास्थ्य कारणों से पैसे की जरूरत में फंसे लोगों और सावधि जमा धारकों ने रिफंड आवेदन की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है। पीठ ने कहा, इस उद्देश्य से हम न्यायमित्र से आग्रह करते हैं कि तय अवधि के लिए वेब पोर्टल को खोल दें। कोर्ट ने इसके साथ ही पहले रिफंड के लिए आवेदन करने वाले खरीदारों को भी विकल्प दिया है कि वह चाहें तो फिर से फ्लैट के लिए आवेदन कर सकते हैं।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कठोर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए किसी व्यक्ति के बार-बार अपराधी होने की आवश्यकता नहीं है। गिरोह का हिस्सा होने पर केस के आरोपी पर भी विशेष कानून के तहत केस चलाया जा सकता है।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने इस विशेष कानून के तहत अभियोजन को चुनौती देने वाली एक महिला श्रद्धा गुप्ता की याचिका को खारिज कर दिया। महिला का कहना था कि उसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और उसे पहली बार किसी आपराधिक मामले में नामजद किया गया है, ऐसे में उसपर गैंगस्टर एक्ट नहीं लग सकता। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) और गुजरात आतंकवाद एवं संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के विपरीत, गैंगस्टर अधिनियम के तहत ऐसा कोई विशेष प्रावधान नहीं है जिसमें कहा गया है कि गैंगस्टर एक्ट के तहत किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने के लिए एक से अधिक एफआईआर या चार्जशीट होनी चाहिए।

कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार क़ानून के प्रावधानों को पढ़ा और माना जाना चाहिए। गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों से साफ है कि गिरोह का सदस्य होने पर और गैंगस्टर्स में उल्लिखित गतिविधियों में लिप्त होने पर एक अपराध के लिए भी इस विशेष अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

दिल्ली की जंग…संविधान पीठ करे मामले की सुनवाई : केंद्र

दिल्ली की प्रशासनिक सेवाओं के अधिकार को लेकर राज्य सरकार से जंग के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राजधानी में ट्रांसफर-पोस्टिंग केंद्र के नियंत्रण में होनी चाहिए। केंद्र ने प्रशासनिक सेवाओं के मुद्दे को संविधान पीठ को भेजे जाने का अनुरोध किया।

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की पीठ से कहा कि संविधान पीठ को भेजने के 2017 के आदेश से समझा जा सकता है कि अनुच्छेद 239एए के सभी पहलुओं के लिए जरूरी संदर्भ शर्तों की व्याख्या की जरूरत है। मेहता ने कहा, अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सुझाए शासन के मॉडल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए उचित नहीं समझा जाता है।

उचित शासन मॉडल सुझाने के लिए बालकृष्णन समिति का गठन हुआ था। मेहता ने दलील दी, दिल्ली विधानसभा के विधायी अधिकारों के संबंधों में सूची 2 की प्रविष्टि 41 को लेकर विवादों पर संविधान पीठ फैसला नहीं करती, विवाद पर प्रभावी तरीके से निर्णय नहीं लिया जा सकता।

यूनिटेक के घर खरीदारों को मिला रिफंड का मौका

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूनिटेक के ऐसे घर खरीदारों को पैसा वापस लेने का विकल्प दिया जिनकी उम्र 75 वर्ष से अधिक है या जिन्हें स्वास्थ्य कारणों से पैसे की जरूरत है। कोर्ट ने घर खरीदारों से जुड़े वेब पोर्टल पर 15 मई तक जरूरी डाटा अपलोड करने के लिए कहा है। वहीं यूनीटेक बोर्ड मैनेजमेंट ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि कानूनी अनुमति मिलने और फंड उपलब्ध होने पर कंपनी इस वर्ष अगस्त से शुरू कर अगले नौ से 12 महीने में एक से डेढ़ हजार तक फ्लैटों की आपूर्ति कर सकती है। कंपनी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण को कोर्ट ने स्थिति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने इस बात पर विचार किया 75 वर्ष से अधिक उम्र वालों, स्वास्थ्य कारणों से पैसे की जरूरत में फंसे लोगों और सावधि जमा धारकों ने रिफंड आवेदन की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है। पीठ ने कहा, इस उद्देश्य से हम न्यायमित्र से आग्रह करते हैं कि तय अवधि के लिए वेब पोर्टल को खोल दें। कोर्ट ने इसके साथ ही पहले रिफंड के लिए आवेदन करने वाले खरीदारों को भी विकल्प दिया है कि वह चाहें तो फिर से फ्लैट के लिए आवेदन कर सकते हैं।



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