आज का शब्द: सम्मुख और गुलाब खंडेलवाल की कविता ‘कहाँ है ओ अनंत के वासी’

By | May 1, 2022


                
                                                             
                            हिंदी है हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है 'सम्मुख' जिसका अर्थ है 1. जो आँखों के सामने विद्यमान हो 2. समक्ष। कवि गुलाब खंडेलवाल ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
                                                                     
                            

कहाँ है, ओ अनंत के वासी ?
तू मन में है फिर भी आँखें हैं दर्शन की प्यासी

प्रेम-भक्ति के तार भले ही मैंने तुझ से बाँधे
रह-रहकर उठ रहे विवादी सुर भी उनसे आधे
नयनों के सम्मुख दिखती है मुझको अंध गुफा-सी

कितनी बार परस तेरा मैंने मस्तक पर पाया
कितनी बार डूबते मुझको तू तट पर ले आया
फिर भी क्यों हटती न हटाए चिंता की गलफाँसी ?

नियम नियामक दोनों तू नियमों का हो दृढ़ पालक
पर न नियम क्या बने क्षमा के, भूल करे यदि बालक
गिरते-पड़ते भी जो तुझ तक आने का अभिलाषी।

कहाँ है, ओ अनंत के वासी ?
तू मन में है फिर भी आँखें हैं दर्शन की प्यासी

3 hours ago



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