आज का शब्द: भद्र और चंद्रकांत देवताले की कविता- किराए की दुनिया और उधार के समय की कैंची से आज़ाद हूँ

By | May 24, 2022


                
                                                             
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- भद्र, जिसका अर्थ है- सभ्य, शिष्ट, सज्जन, श्रेष्ठ। प्रस्तुत है चंद्रकांत देवताले की कविता- किराए की दुनिया और उधार के समय की कैंची से आज़ाद हूँ
                                                                     
                            

मैं मरने से नहीं डरता हूँ 
न बेवजह मरने की चाहत सँजोए रखता हूँ 
एक जासूस अपनी तहक़ीक़ात बख़ूबी करे 
यही उसकी नियामत है 

किराए की दुनिया और उधार के समय की 
कैंची से आज़ाद हूँ पूरी तरह 
मुग्ध नहीं करना चाहता किसी को 
मेरे आड़े नहीं आ सकती सस्ती और सतही मुस्कुराहटें 

आगे पढ़ें

33 minutes ago



Source link