अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी भारत के गेहूं की मांग: रूस-यूक्रेन जंग के बीच 30 देशों को निर्यात करने की तैयारी

By | March 26, 2022


सार

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के विश्वस्त सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि ये देश पहले से ही रूस और यूक्रेन के साथ भारत से भी गेहूं का आयात कर रहे हैं। लेकिन रूस और यूक्रेन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी बेहद कम थी। लेकिन युद्ध के बाद से भारत अब इन दोनों देशों की तुलना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रहा है…

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रूस-यूक्रेन जंग के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के गेहूं की मांग बढ़ गई है। इन दोनों देशों से अब तक गेहूं आयात करने वाले करीब 30 देश जल्द ही भारत से गेहूं ले सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार ने अपने स्तर पर योजना बनानी शुरू कर दी है। दरअसल, भारत गेहूं निर्यात के मामले में रूस और यूक्रेन की जगह लेना चाहता है। इसलिए केंद्र सरकार ऐसे देशों के साथ करार के जरिए या निजी व्यापारिक माध्यमों से गेहूं निर्यात बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के विश्वस्त सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि ये देश पहले से ही रूस और यूक्रेन के साथ भारत से भी गेहूं का आयात कर रहे हैं। लेकिन रूस और यूक्रेन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी बेहद कम थी। लेकिन युद्ध के बाद से भारत अब इन दोनों देशों की तुलना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रहा है। इन देशों में मिस्र, सीरिया, मोरक्को, तुर्की, अजरबैजान, सूडान, इटली, यमन, ग्रीस और पूर्वी अफ्रीका के सभी देश शामिल हैं। जो यदा-कदा ही भारत से गेहूं खरीदते हैं।

कई देशों ने बनाई रूस-यूक्रेन से दूरी

एपीडा से जुड़े सूत्र ने कहा कि फिलहाल गेहूं के निर्यात के मामले में रूस और यूक्रेन का वर्चस्व है। कई बड़े देश इन दोनों देशों से गेहूं का आयात करते हैं। लेकिन युद्ध के बाद से स्थिति बदल गई है। भारत के गेहूं की मांग अन्य देशों में बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। हमारा मकसद भी ऐसे देशों को गेहूं निर्यात कर मौजूदा संकट में वैकल्पिक व्यवस्था करना नहीं है। बल्कि हम इन देशों के बाजारों में अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनना चाहते हैं। हम अल्पावधि के लाभ को नहीं देख रहे हैं बल्कि इस अवसर का इस्तेमाल कर दुनिया के प्रमुख गेहूं आयातक देशों के साथ मजबूत और दीर्घकालिक रिश्ता कायम करना चाहते हैं।

आज दुनिया के अग्रणी गेहूं आयातक देशों में मिस्र, इंडोनेशिया, तुर्की, चीन, नाइजीरिया, इटली, अलजीरिया, फिलीपींस, जापान, मोरक्को, ब्राजील आदि शामिल हैं। इनमें से बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और जापान में ही भारत का गेहूं जाता है। ऐसे में भारत के पास निर्यात का विस्तार करने की व्यापक संभावना है, क्योंकि प्रमुख निर्यातक देश रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण अन्य देश फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, इन 30 देशों में गेहूं निर्यात करने का निर्णय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में अग्रणी गेहूं निर्यातकों के साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल थे। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस बैठक में मौजूद थे। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में करीब 1.1 से 1.2 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है, जो वित्त वर्ष 2022 की तुलना में 70 से 72 लाख टन अधिक है। हालांकि कुछ व्यापारियों का कहना है कि 1 से 1.1 करोड़ टन निर्यात का लक्ष्य वाजिब हो सकता है क्योंकि मानसून के दौरान निर्यात धीमा पड़ जाएगा।

निर्यात में आई जबरदस्त तेजी

भारत ने पिछले तीन वर्षों में 2,352.22 मिलियन डॉलर का गेहूं निर्यात किया है, जिसमें चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 महीने शामिल हैं। 2019-20 में गेहूं का निर्यात 61.84 मिलियन डॉलर था जो 2020-21 में बढ़कर 549.67 मिलियन डॉलर हो गया। हालांकि भारत वैश्विक व्यापार में शीर्ष दस गेहूं निर्यातकों में से नहीं है, लेकिन निर्यात में इसकी वृद्धि दर अन्य देशों से आगे निकल गई है। और दुनिया भर में नए बाजारों तक पहुंचने में भारत तेजी से कदम उठा रहा है। भारत का गेहूं निर्यात मुख्य रूप से पड़ोसी देशों को होता है, जिसमें 2020-21 में मात्रा और मूल्य दोनों के लिहाज से बांग्लादेश की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 54 फीसदी से अधिक है। 2020-21 में भारत ने यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनेशिया जैसे नए गेहूं बाजारों में प्रवेश किया।

विस्तार

रूस-यूक्रेन जंग के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत के गेहूं की मांग बढ़ गई है। इन दोनों देशों से अब तक गेहूं आयात करने वाले करीब 30 देश जल्द ही भारत से गेहूं ले सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार ने अपने स्तर पर योजना बनानी शुरू कर दी है। दरअसल, भारत गेहूं निर्यात के मामले में रूस और यूक्रेन की जगह लेना चाहता है। इसलिए केंद्र सरकार ऐसे देशों के साथ करार के जरिए या निजी व्यापारिक माध्यमों से गेहूं निर्यात बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के विश्वस्त सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि ये देश पहले से ही रूस और यूक्रेन के साथ भारत से भी गेहूं का आयात कर रहे हैं। लेकिन रूस और यूक्रेन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी बेहद कम थी। लेकिन युद्ध के बाद से भारत अब इन दोनों देशों की तुलना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रहा है। इन देशों में मिस्र, सीरिया, मोरक्को, तुर्की, अजरबैजान, सूडान, इटली, यमन, ग्रीस और पूर्वी अफ्रीका के सभी देश शामिल हैं। जो यदा-कदा ही भारत से गेहूं खरीदते हैं।

कई देशों ने बनाई रूस-यूक्रेन से दूरी

एपीडा से जुड़े सूत्र ने कहा कि फिलहाल गेहूं के निर्यात के मामले में रूस और यूक्रेन का वर्चस्व है। कई बड़े देश इन दोनों देशों से गेहूं का आयात करते हैं। लेकिन युद्ध के बाद से स्थिति बदल गई है। भारत के गेहूं की मांग अन्य देशों में बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। हमारा मकसद भी ऐसे देशों को गेहूं निर्यात कर मौजूदा संकट में वैकल्पिक व्यवस्था करना नहीं है। बल्कि हम इन देशों के बाजारों में अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनना चाहते हैं। हम अल्पावधि के लाभ को नहीं देख रहे हैं बल्कि इस अवसर का इस्तेमाल कर दुनिया के प्रमुख गेहूं आयातक देशों के साथ मजबूत और दीर्घकालिक रिश्ता कायम करना चाहते हैं।

आज दुनिया के अग्रणी गेहूं आयातक देशों में मिस्र, इंडोनेशिया, तुर्की, चीन, नाइजीरिया, इटली, अलजीरिया, फिलीपींस, जापान, मोरक्को, ब्राजील आदि शामिल हैं। इनमें से बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और जापान में ही भारत का गेहूं जाता है। ऐसे में भारत के पास निर्यात का विस्तार करने की व्यापक संभावना है, क्योंकि प्रमुख निर्यातक देश रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण अन्य देश फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, इन 30 देशों में गेहूं निर्यात करने का निर्णय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में अग्रणी गेहूं निर्यातकों के साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल थे। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस बैठक में मौजूद थे। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में करीब 1.1 से 1.2 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है, जो वित्त वर्ष 2022 की तुलना में 70 से 72 लाख टन अधिक है। हालांकि कुछ व्यापारियों का कहना है कि 1 से 1.1 करोड़ टन निर्यात का लक्ष्य वाजिब हो सकता है क्योंकि मानसून के दौरान निर्यात धीमा पड़ जाएगा।

निर्यात में आई जबरदस्त तेजी

भारत ने पिछले तीन वर्षों में 2,352.22 मिलियन डॉलर का गेहूं निर्यात किया है, जिसमें चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 महीने शामिल हैं। 2019-20 में गेहूं का निर्यात 61.84 मिलियन डॉलर था जो 2020-21 में बढ़कर 549.67 मिलियन डॉलर हो गया। हालांकि भारत वैश्विक व्यापार में शीर्ष दस गेहूं निर्यातकों में से नहीं है, लेकिन निर्यात में इसकी वृद्धि दर अन्य देशों से आगे निकल गई है। और दुनिया भर में नए बाजारों तक पहुंचने में भारत तेजी से कदम उठा रहा है। भारत का गेहूं निर्यात मुख्य रूप से पड़ोसी देशों को होता है, जिसमें 2020-21 में मात्रा और मूल्य दोनों के लिहाज से बांग्लादेश की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 54 फीसदी से अधिक है। 2020-21 में भारत ने यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनेशिया जैसे नए गेहूं बाजारों में प्रवेश किया।



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